Jat Reservation Agitation Arson Case: Major Verdict by Panchkula CBI Court

जाट आरक्षण आंदोलन आगजनी केस: पंचकूला सीबीआई अदालत का बड़ा फैसला

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Jat Reservation Agitation Arson Case: Major Verdict by Panchkula CBI Court

हरियाणा के बहुचर्चित जाट आरक्षण आंदोलन से जुड़े रोहतक आगजनी मामले में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया। अदालत ने इस मामले में नामजद सभी 56 जीवित आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। बचाव पक्ष के वकील जितेंद्र हुड्डा ने इस फैसले को न्याय की जीत बताया और कहा कि लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई का अंत अब परिवारों के लिए राहत लेकर आया है।

फरवरी 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया था। इसी दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के रोहतक स्थित आवास पर उपद्रवियों ने हमला कर दिया था। आरोप था कि भीड़ ने तोड़फोड़ की और कोठी को आग के हवाले कर दिया। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।

सीबीआई ने इस मामले में कुल 60 लोगों को आरोपी बनाया था। ट्रायल के दौरान विजेंद्र, प्रदीप और सुमित नामक तीन आरोपियों की मृत्यु हो गई, जबकि धर्मेंद्र हुड्डा को अदालत ने पहले ही भगोड़ा घोषित कर दिया था। शेष 56 आरोपियों पर मुकदमा जारी रहा। लगभग दस साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने आज सभी को दोषमुक्त करार दिया।

यह फैसला उन परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो वर्षों से अदालतों के चक्कर लगा रहे थे। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े कई मामलों में यह सबसे प्रमुख केस था, जिसकी निगरानी केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियां कर रही थीं।

जाट आंदोलन ने हरियाणा की राजनीति और सामाजिक समीकरणों पर गहरा असर डाला था। आंदोलन के बाद राज्य सरकार पर जाट समुदाय को आरक्षण देने का दबाव बढ़ा और यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना। रोहतक आगजनी का मामला उस समय राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता रहा। अब अदालत के फैसले ने इस हाई-प्रोफाइल केस का पटाक्षेप कर दिया है।

पंचकूला सीबीआई अदालत का यह निर्णय न केवल आरोपियों और उनके परिवारों के लिए राहत है बल्कि यह भी दर्शाता है कि न्यायालय सबूतों के आधार पर ही फैसला सुनाता है। इस फैसले से आंदोलन से जुड़े अन्य मामलों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

यह घटनाक्रम हरियाणा की राजनीति में एक अहम मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि जाट आरक्षण आंदोलन ने राज्य की सामाजिक संरचना और राजनीतिक समीकरणों को गहराई से प्रभावित किया था।